आज यानी 9 जून को ज्येष्ठ माह का छठा और अधिकमास का अंतिम बड़ा मंगल है. हिंदू धर्म में बड़े मंगल का दिन भगवान हनुमान की भक्ति और श्रद्धा का विशेष पर्व माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही भगवान श्रीराम और हनुमान जी का प्रथम मिलन हुआ था. मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. ऐसे में आइए जानते हैं बड़े मंगल पर हनुमान जी का पूजन कैसे करें, साथ ही जानेंगे आज पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.
ऐसे करें हनुमान जी की पूजा
- बड़े मंगल के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे लाल या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें.
- इसके बाद मन में व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थल की सफाई करके वहां लाल कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- पूजा के दौरान भगवान को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल पुष्प, बूंदी के लड्डू, केला, गुड़-चना और पान अर्पित करें.
- हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं.
- इसके बाद घी का दीपक जलाकर श्रद्धा के साथ पूजा करें.
- पूजा के बाद हनुमान चालीसा का 11 या 21 बार पाठ करना शुभ माना जाता है.
- संभव हो तो बजरंग बाण का पाठ भी किया जा सकता है. मान्यता है कि इससे भय, बाधाएं और नकारात्मकता दूर होती है.
- पूजा के अंत में आरती करके अपनी मनोकामनाएं भगवान के सामने प्रकट करें.
धार्मिक कार्यों के लिए आज दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. इस समय पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना फलदायी माना गया है. वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
हनुमान जी के मंत्रऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ।।
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
जो हनुमानजी की आरती गावै।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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