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महाभारत के अनुसार घोर पाप और नरक से बचने के लिए एकादशी समेत इन 6 मौकों पर भूलकर भी नहीं खाना चाहिए अन्न

Ann kab nahi khana chahiye: हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित एकादशी व्रत वाले दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता है. इसकी जगह पर श्री हरि के भक्तों के लिए फलहार का विधान है. जिस अन्न की महिमा को लेकर धर्मशास्त्र में तमाम तरह की बातें बताई गई हैं, क्या आप जानते हैं कि उसका सेवन एकादशी के अलावा और किन मौकों पर नहीं किया जाता है?

महाभारत के अनुसार घोर पाप और नरक से बचने के लिए एकादशी समेत इन 6 मौकों पर भूलकर भी नहीं खाना चाहिए अन्न
Religious rules for food: अन्न कब और क्यों नहीं खाना चाहिए?
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Ann Khane Ke Niyam: सनातन परंपरा में तमाम तरह के देवी-देवताओं को प्रसन्न करके उनकी कृपा पाने, नवग्रहों से जुड़े दोषों को दूर करने और तमाम तरह की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए व्रत और उपवास करने का विधान है. आस्था से जुड़े इन व्रत और उपवास वाले दिन व्यक्ति विधि-विधान से पूजा, जप, तप आदि करता हुआ बगैर भोजन या जल ग्रहण किए अपने आराध्य देवी-देवता को प्रसन्न करने का प्रयास करता है. बिल्कुल वैसे ही जैसे आज अधिक मास की एकादशी यानि पद्मिनी एकादशी वाले दिन तमाम साधक श्री हरि को प्रसन्न करने का प्रयास कर रह रहे हैं, लेकिन क्या आपको मालूम है कि एकादशी के अलावा भी कुछेक दिन ऐसे होते हैं, जिसमें अन्न का सेवन करने पर व्यक्ति को बड़ा दोष लगता है और उसे इस पाप के लिए अंत समय में नर्क जाना पड़ता है. आइए जानते हैं कि हमारे धर्मशास्त्र में किन 6 अवसरों पर व्यक्ति को भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. 

कब-कब नहीं खाना चाहिए अन्न 

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अयोध्या के जानकीघाट स्थित बड़ा धाम के रसिक पीठाधीश्वर स्वामी जन्मेजयशरण जी महाराज के अनुसार महाभारत में एकादशी समेत कुल 6 अवसरों पर अन्न का पान या फिर कहें सेवन करना अत्यंत ही दोषपूर्ण माना गया है. धर्मशास्त्र में कही गई इस बात को वे नीचे दिये गये श्लोक के माध्यम से विस्तार से स्पष्ट करते हैं:  

रविन्दुग्रासे हरिजन्मकाले कन्यादाने द्विजभोजने च.
प्राणप्रयाणे हरिवासरे च यदन्नं भुंक्ते नरकं प्रयान्ति.

1. रविन्दुग्रासे: सनातन परंपरा में सूर्यग्रहण या फिर चंद्रग्रहण के लगने पर कुछेक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय अन्न का सेवन करना दोषपूर्ण माना गया है. इस दौरान बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को कुछेक शर्तों के साथ थोड़ी ढील दी जाती है, लेकिन सामर्थ्यवान व्यक्ति के द्वारा ग्रहण काल में अन्न का सेवन करना बड़ा दोष माना जाता है. धर्म शास्त्र के अनुसार सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. 

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2. हरिजन्मकाले : हिंदू मान्यता के अनुसर रामनवमी, जानकी नवमी, नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती जैसे पावन अवसर पर भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. इन पावन दिनों में सिर्फ और सिर्फ फलहार करना चाहिए. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस नियम की अनदेखी करता है, वह नरकगामी होता है.  

3. कन्यादाने : हिंदू मान्यता के अनुसार जिस दिन कन्या का विवाह हो और व्यक्ति के द्वारा कन्या दान का संकल्प किया गया हो, उस दिन इस पुनीत कार्य को करने से पूर्व यदि व्यक्ति अन्न का सेवन कर लेता है तो वह अंतकाल में इस दोष के चलते नर्क को प्राप्त होता है. 

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4. द्विज भोजने: धर्म शास्त्र कहता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी ब्राह्मण या संत को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करता है और उन्हें बगैर खाना खिलाए वह व्यक्ति पहले अन्न ग्रहण कर लेता है तो ​वह नर्कगामी होता है. शास्त्र कहता है कि आमंत्रण देने वाले व्यक्ति को हमेशा बुलाए गये ब्राह्मण या संत को भोजन कराने के बाद ही कुछ अन्न ग्रहण करना चाहिए. इससे पूर्व वह फल आदि ग्रहण कर सकता है. 

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5. प्राणप्रयाणे: हिंदू मान्यता के अनुसार यदि घर में किसी की मृत्यु हो गई हो और उसका मृत शरीर घर में पड़ा हो या फिर किसी के प्राण जाने को हो तो व्यक्ति को उस समय भूलकर भी अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिए. ऐसे समय में किया गया भोजन दोषपूर्ण होता है और इस पाप कर्म के लिए व्यक्ति को नर्क जाना पड़ता है. 

6. हरिवासरे: हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत वाले दिन अन्न ग्रहण करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद नर्क को जाता है. धर्म शासत्र में एकादशी व्रत में अन्न का सेवन करना घोर पाप माना गया है. ऐसे में पुण्य की कामना करने वाले व्यक्ति को एकादशी वाले दिन भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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