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ऑटो चालक के बेटे ने JEE के OBC कैटेगरी में हासिल की 1028वीं Rank, पढ़िए संघर्ष से सफलता की कहानी

इंद्रजीत ने पिछले साल भी यह परीक्षा पास की थी, लेकिन बेहतर रैंक और अच्छे संस्थान की चाह में उन्होंने हार नहीं मानी और एक साल और तैयारी की. घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे महंगी फिजिकल कोचिंग नहीं ले सकते थे, इसलिए उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई को अपना हथियार बनाया.

ऑटो चालक के बेटे ने JEE के OBC कैटेगरी में हासिल की 1028वीं Rank, पढ़िए संघर्ष से सफलता की कहानी
इंद्रजीत की दोनों बड़ी बहनें भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं.

श्रीगंगानगर जिले के गांव पठानवाला के छात्र इंद्रजीत ने JEE परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है. आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों और तमाम मुश्किलों के बावजूद इंद्रजीत ने OBC वर्ग में 1028वीं रैंक प्राप्त की है. उसकी सफलता की कहानी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

बेहतर रैंक के लिए दोबारा दी परीक्षा

इंद्रजीत ने बताया कि उसने पिछले वर्ष भी JEE परीक्षा पास की थी, लेकिन उसे अपनी रैंक से संतुष्टि नहीं थी. बेहतर संस्थान में प्रवेश पाने के लक्ष्य के साथ उसने एक और साल तैयारी करने का फैसला किया. पूरे वर्ष उसने अनुशासित ढंग से पढ़ाई जारी रखी और इस बार उसकी मेहनत रंग लाई. लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर उसने शानदार रैंक हासिल की.

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महंगी कोचिंग नहीं, ऑनलाइन पढ़ाई बनी सहारा

परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाखों रुपये खर्च कर फिजिकल कोचिंग करवाई जा सके. ऐसे में इंद्रजीत ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से तैयारी शुरू की. उसने नियमित रूप से ऑनलाइन क्लासेज अटेंड कीं और उपलब्ध अध्ययन सामग्री का भरपूर उपयोग किया. उसका कहना है कि ऑनलाइन शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उसकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

लाइब्रेरी में बैठकर पूरी की तैयारी

घर पर तेज इंटरनेट और निर्बाध बिजली की सुविधा नहीं थी, जिसके कारण पढ़ाई में बार-बार बाधाएं आती थीं. ऐसे में इंद्रजीत गांव से तीन से चार किलोमीटर दूर स्थित लाइब्रेरी में जाकर घंटों अध्ययन करता था. कई बार वह पैदल जाता तो कभी घर की पुरानी मोटरसाइकिल से लाइब्रेरी पहुंचता. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया.

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 स्टोर रूम को बनाया पढ़ाई का कमरा

इंद्रजीत की बहन प्रियंका ने बताया कि घर में पढ़ाई के लिए अलग से कोई कमरा उपलब्ध नहीं था. ऐसे में परिवार ने स्टोर रूम को साफ कर उसे अध्ययन कक्ष के रूप में तैयार किया. कमरे में आज भी कबाड़ का सामान रखा हुआ है और कई बार वहां अन्य घरेलू सामान भी रखा रहता है. बावजूद इसके इंद्रजीत ने उसी माहौल में बैठकर अपनी तैयारी जारी रखी.

 गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना जारी रखी मेहनत

परिवार के अनुसार जिस कमरे में इंद्रजीत पढ़ाई करता था, वह गर्मियों में बेहद गर्म और सर्दियों में काफी ठंडा हो जाता था. कई बार बिजली कटौती के कारण अतिरिक्त परेशानियों का भी सामना करना पड़ता था. इसके बावजूद उसने कभी शिकायत नहीं की और लगातार अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा. यही दृढ़ संकल्प उसकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना.

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 ऑटो चालक पिता को बेटे पर गर्व

इंद्रजीत के पिता रामनिवास श्रीगंगानगर शहर में ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उन्होंने बताया कि आर्थिक चुनौतियां हमेशा बनी रहीं, लेकिन बेटे की पढ़ाई को लेकर परिवार ने कभी हार नहीं मानी. आज बेटे की उपलब्धि से पूरा परिवार बेहद खुश है और उन्हें अपने बेटे पर गर्व महसूस हो रहा है. उनका कहना है कि मेहनत का फल आखिरकार मिल ही जाता है.

 बहनों को भी मिली नई प्रेरणा

इंद्रजीत की दोनों बड़ी बहनें भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं. बहन भावना का कहना है कि भाई की सफलता ने पूरे परिवार को नई ऊर्जा दी है. अब उन्हें भी विश्वास हो गया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. परिवार में हमेशा सकारात्मक माहौल बनाए रखने का प्रयास किया गया ताकि कोई भी मानसिक दबाव में न आए.

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 गांव के बच्चों के लिए बना प्रेरणास्रोत

गांव के पूर्व सरपंच के पुत्र दीपक कुमार ने बताया कि पठानवाला जैसे छोटे गांव से इस स्तर की सफलता बहुत बड़ी उपलब्धि है. इंद्रजीत ने साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या महंगे संसाधन ही जरूरी नहीं होते. उसकी उपलब्धि गांव के अन्य विद्यार्थियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास देगी. आज पूरे गांव को इंद्रजीत पर गर्व है.

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