दिल्ली एनसीआर में लोन माफिया की करतूत, एक मकान पर दो-दो बैंकों से फर्जी लोन लिया

लोन माफिया मकान का लोन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी कर रहे, गाजियाबाद में एक कोठी के दो बैंकों समेत चार मालिक

दिल्ली एनसीआर में लोन माफिया की करतूत, एक मकान पर दो-दो बैंकों से फर्जी लोन लिया

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

घर का एक लोन लेने के लिए आम आदमी को बैंकों के दर्जनों चक्कर काटने पड़ते हैं लेकिन दिल्ली NCR के लोन माफिया (Loan Mafia) सालों पहले मरे आदमी के नाम से करोड़ों का लोन करा रहे हैं. कहीं तो एक मकान पर दो-दो बैंकों से फर्जी लोन स्वीकृत कराया है. लोन माफिया मकान का लोन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं. 

गाजियाबाद की पॉश कॉलोनी में एक कोठी दो साल से वीरान पड़ी है. दरवाजे पर ताले पड़े होने की वजह इस एक कोठी के चार मालिक होना है. इनमें दो इंसान हैं और दो बैंक. अब यह वीरान कोठी आवारा कुत्तों का आशियाना है. इस कोठी के मालिकों में से एक भुवन शर्मा बताते हैं कि लोन की वजह से कोठी के पेपर बैंक में रखे थे, लेकिन वहां से निकलवाकर उसी पेपर को दूसरे बैंक में लगाकर वहां से भी सात करोड़ का लोन ले लिया. अब दो अलग-अलग बैंक भी इस पर अपना दावा जता रहे हैं. 

भुवन शर्मा ने कहा कि ''मैंने और अविनाश ने कोठी के लिए करीब 3 करोड़ 70 लाख का लोन लिया. फिर लक्ष्य तंवर और सुनील ने PNB से हमारे ओरजनल डीड पेपर निकलवाकर सेंट्रल बैंक में एक फर्जी कंपनी की सात करोड़ की लिमिट कराई, फिर पैसे निकाल लिए.''

बुलंदशहर रोड में गाजियाबाद की दो करोड़ की प्रापर्टी पर दस करोड़ लोन लिया गया वो भी आगरा में. बुलंदशहर रोड में एक इंडस्ट्रियल प्लॉट है. एक कंपनी का बोर्ड और प्लॉट के कागज दिखाकर दस करोड़ का लोन ले लिया गया है. जबकि इसका बाजार भाव करीब दो करोड़ के आसपास का है. गाजियाबाद के शिकायतकर्ता सतीश गर्ग ने बताया कि  ''हम अगर दस लाख लोन चाहें तो हमें सैकड़ों चक्कर काटने पड़ते हैं लेकिन इन लोगों को दस मिनट में दस करोड़ का लोन दे दिया गया. ये बैंक की मिलीभगत के बगैर कैसे हो सकता है?''

प्लॉट ही नहीं कई गरीब लोगों के नाम पर करोड़ों के लोन हो गए. जितेंद्र तुराबनगर में कपड़े की दुकान पर काम करके आठ हजार महीना कमाते हैं. उनके नाम से एक करोड़ 30 लाख रुपये का लोन ले लिया गया. गाजियाबाद के जितेंद्र ने कहा कि ''मुझसे मेरे पेपर ले लिए गए. मेरे कहीं साइन भी नहीं हैं फिर जब बैंक का नोटिस मेरे घर पहुंचा तो पता चला कि मेरे नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये लोन ले लिया गया.''

जितेंद्र ही नहीं लोन की ठगी के शिकार रिटायर्ड पुलिस अधिकारी डीएस मौर्या, सुखपाल सिंह जैसे दर्जनों लोग हमें मिले. बैंक की मिलीभगत की जब हमने पड़ताल शुरू की तो हमारे हाथ एक जांच रिपोर्ट लगी जिसमें एक बैंक कर्मचारी ने बयान दिया कि बैंक के दूसरे लोगों के कहने पर गारंटर के तौर पर साइन कर दिया करते थे. इस जांच रिपोर्ट में अकेले गाजियाबाद में लोन के नाम पर 100 करोड़ रुपये का फ्रॉड बताया गया.. इसका मास्टर माइंड यानी लोन माफिया लक्ष्य तंवर बताया जा रहा है. इसके खिलाफ CBI और पुलिस में छह से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं लेकिन फिलहाल वो गिरफ्त से बाहर है.


मेरठ के शिकायतकर्ता सुखपाल सिंह ने बताआ कि ''एक शख्श की मौत 2007 में हो चुकी है. उसके नाम पर पहले बैंक खाता खोला फिर करोड़ों रुपये लोन करा लिया. इस तरह के फ्राड किए गए हैं.''

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लोन माफिया ने बैंक मैनेजरों से मिलकर गाजियाबाद, मेरठ और आगरा के तमाम लोगों को हाउस लोन के बहाने ठगा लेकिन जिनके घर और प्लॉट पर फर्जी लोन कराए गए उन पीड़ितों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए अब दर-दर भटकना पड़ रहा है. लोन माफिया अंडरग्राउंड हो चुका है.