यह ख़बर 24 अक्टूबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

मंत्रालय 2012-13 के लिए और धन न मांगे : वित्त मंत्रालय

खास बातें

  • वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों से बजटीय अनुशासन का कड़ाई से पालन करने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि राजकोषीय स्थिति तंग होने के कारण अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।
नई दिल्ली:

वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों से बजटीय अनुशासन का कड़ाई से पालन करने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि राजकोषीय स्थिति तंग होने के कारण अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने सभी मंत्रालयों से 2012-13 के बजट में आवंटित धन से काम चलाने को कहा है और अतिरिक्त धनराशि मांगने से मना किया है।’’ वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान तैयार करते समय केंद्रीय मंत्रालयों को यह संकेत दिया। 2013-14 के बजट के दौरान संशोधित अनुमान संसद में पेश किया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, ‘‘राजस्व बहुत अधिक नहीं है। एक ही तरीका है जिसके जरिये हम व्यय को कम कर सकते हैं और वह है खचरें को नियंत्रित करना। इसीलिए हमने मंत्रालयों से बजटीय आवंटन का कड़ाई से पालन करने को कहा है।’’ संशोधित अनुमान के समय विभिन्न मंत्रालय पूरे वित्त वर्ष के लिये व्यय अनुमान देते हैं।

वितत मंत्रालय के कई अधिकारी पहले ही यह संकेत दे चुका है कि सरकार के लिये राजकोषीय घाटा बजटीय अनुमान के अनुमान के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद 5.1 प्रतिशत पर रखना मुश्किल होगा।

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सब्सिडी पर खर्च बढ़ने, कर वसूली वृद्धि की धीमी रफ्तार तथा विनिवेश कार्यक्रम के गति नहीं पकड़ने के कारण सरकार की वित्तीय समस्यांए बढ़ रही हैं।