Noida Real Estate Trends: एक टाइम था जब दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले किसी भी मिडिल क्लास फैमिली का सबसे बड़ा सपना होता था कि नोएडा या ग्रेटर नोएडा में अपना एक छोटा सा 1बीएचके या फिर 2 बीएचके फ्लैट हो. वो एक-दो कमरे, एक छोटी सी बालकनी और अपनों का साथ. जिंदगी पूरी सी लगती थी. लेकिन समय का पहिया घूमा और आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. जिन 1 बीएचके और 2 बीएचके फ्लैट्स को कभी रियल एस्टेट मार्केट का हॉट केक माना जाता था, यानी अरे ये तो कभी भी सेल हो जाएंगे, आज वो खरीदारों के लिए तरस रहे हैं.
ये कहानी है नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट बाजार की. ये मार्केट इस समय एक ऐसे ही बदलाव का गवाह बन रहा है, जिसने बड़े-बड़े बिल्डर्स को हैरान कर दिया. बाजार में अब छोटे घरों की रौनक लगभग गायब हो चुकी है और उनकी जगह ले ली है आलीशान, स्पेसियस और लग्जरी 3 बीएचके के साथ 4 बीएचके अपार्टमेंट्स ने. नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च होते ही कुछ ही महीनों में सोल्ड आउट के बोर्ड टंग जाते हैं, जबकि पुराने बने-बनाए छोटे फ्लैट्स खाली पड़े हुए हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक लोगों को अपने वो प्यारे छोटे घर चुभने लगे? इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए एनडीटीवी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा के कुछ बिल्डर्स से बातचीत की.
महामारी के बाद से बदला माहौल
इस बदलाव की शुरुआत किसी आर्थिक सुधार के बाद नहीं बल्कि एक वायरस के बाद हुई. कोविड-19 महामारी ने हमारी जिंदगी जीने के तरीके को बदल दिया. लॉकडाउन के उन महीनों ने हमें सिखाया कि जब बाहर की दुनिया बंद हो जाती है, तो घर ही आपकी पूरी दुनिया बन जाता है. रियल एस्टेट डेवलपर्स ने भी यही माना. उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने लोगों के घरों को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया. जो जगह कभी सिर्फ रहने की मानी जाती थी, वो अब काम करने, पढ़ाई करने जरूरतों को पूरा करने की जगह बन गई. इसी वजह से खरीदार अब ज्यादा सुविधाओं और बड़ी जगह वाले बड़े घरों को खरीदने के मामले में आगे रख रहे हैं.
बड़े घर बने नया स्टेटस सिंबल
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर Pi-1 में नॉर्थ विंड एस्टेट डेवलपर के मालिक मनोज गर्ग ने बताया कि आज के खरीदार ऐसे आलीशान और पूरी तरह से फ़र्निश्ड घरों को पसंद करते हैं, जिनमें वो तुरंत रहने जा सकें. उनके अनुसार, आज की युवा पीढ़ी को अलग से फ़र्नीचर खरीदने या घर की सजावट पर ज्यादा समय खर्च करने का झंझट पसंद नहीं है. उन्होंने ये भी बताया कि खरीदारों की पर्चेजिंग पावर में इजाफा हुआ है. साथ ही बड़े घरों के लिए होम लोन आसानी से मिल जाता है. ये बात भी ठीक है कि अब परिवार ऐसे घर चाहते हैं जिनमें ज्यादा कमरे हों, जिससे बच्चे, मेहमान या मिलने-जुलने वाले रिश्तेदार आराम से आ सकें.
वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड कल्चर
ग्रेटर नोएडा के विहान होम्स के मालिक राहुल कपैसिया इस बदलाव को बहुत करीब से देख रहे हैं. उनका कहना है कि हाई-राइज सोसायटियों में 3बीएचके और 4बीएचके अपार्टमेंट्स की डिमांड में उम्मीद से ज्यादा उछाल आया है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) और हाइब्रिड वर्किंग कल्चर को माना जा सकता है.
राहुल कपैसिया के अनुसार, "आज आईटी प्रोफेशनल्स और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोग घर खरीदते समय सबसे पहले ये देखते हैं कि क्या वहां एक अलग वर्क-स्पेस या होम ऑफिस बनाया जा सकता है? जब पति और पत्नी दोनों घर से काम कर रहे हों और बच्चे की ऑनलाइन क्लास चल रही हो, तो 1 बीएचके और 2 बीएचके फ्लैट में प्राइवेसी खत्म हो जाती है. इसलिए, लोग अब हंसते-हंसते ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें एक एक्स्ट्रा कमरा और बड़ी बालकनी मिले."
राहुल ने आगे बताया कि हाई-राइज सोसायटियों के अलावा बिल्डर फ्लोर्स में भी अभी भी लोग 2 बीएचके को खरीद रहे हैं, जिनकी कीमत इस समय 25 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है. लेकिन हां, जो पहले छोटे फ्लैट्स यानी 1 बीएचके बने हुए हैं, उनकी पूछ बिल्कुल भी नहीं है.
बिल्डर्स ने भी बदला गियर
अब वो जमाना लद गया जब बिल्डर्स एक छोटे से प्लॉट पर ज्यादा से ज्यादा माचिस की डिब्बी जैसे फ्लैट्स ठूंसने की कोशिश करते थे. आज के नए प्रोजेक्ट्स किसी फाइव-स्टार रिसॉर्ट से कम नहीं होते. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बन रहे नए प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में अब कई फैसिलिटी दी जा रही हैं, जिसमें शामिल हैं-
- लाइट्स, पंखे और सिक्योरिटी सिस्टम सब कुछ एक टच या आवाज पर कंट्रोल.
- शानदार क्लबहाउस और स्विमिंग पूल, जहां वीकेंड पर बाहर ना जाना पड़े.
- बड़ी पार्किंग और ग्रीनरी
- सीसीटीवी, बायोमेट्रिक और चौबीसों घंटे सिक्योरिटी गार्ड की नजर
- इन-हाउस गेस्ट हाउस की फैसिलिटी
क्यों छोटे फ्लैट्स की डिमांड कम हुई?
अब सिक्के के दूसरे पहलू को देखते हैं. आखिर 1 बीएचके और 2 बीएचके फ्लैट्स की हालत इतनी खराब क्यों हुई? इसका जवाब छुपा है पिछले दशक के रियल एस्टेट पैटर्न में. याद कीजिए आज से 7 से 10 साल पहले, नोएडा एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिल्डर्स ने अंधाधुंध तरीके से 1 और 2 बीएचके फ्लैट्स के बनाया. उस समय टारगेट मिडिल क्लास और वो निवेशक थे जो कम बजट में प्रॉपर्टी में पैसा लगाना चाहते थे. नतीजा ये हुआ कि आज इन इलाकों में छोटे फ्लैट्स की बाढ़ आई है, यानी ओवर-सप्लाई है. लेकिन लेने वाले गायब हैं.
महंगे होम लोन, खराब रीसेल वैल्यू, फ्यूचर-प्रूफिंग सोच और फैसिलिटी की कमी के चलते ग्राहक और इन फ्लेट्स से दूर होते चले गए. ऐसे में अगर बिल्डर्स के साथ बड़े डेवलपर्स को इस सेगमेंट में डिमांड को फिर से वापस लाना है तो इन सभी कमियों पर काम करना होगा-
जेवर एयरपोर्ट का असर
जब हम नोएडा और गौतम बुद्ध नगर के रियल एस्टेट की बात करते हैं, तो जेवर में बने नए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का जिक्र आना लाजिमी है. इस एयरपोर्ट ने पूरे इलाके की किस्मत बदल दी है. एयरपोर्ट के चलते यमुना एक्सप्रेसवे और उसके आस-पास के इलाकों में जमीनों और घरों की कीमतें आसमान छू रही हैं. हालांकि, एक्सपर्ट राहुल कपैसिया का मानना है कि एयरपोर्ट की वजह से जेवर के पास तो कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन अगर हम पूरे ग्रेटर नोएडा की बात करें, तो यहां कीमतों में बढ़ोतरी अभी भी मॉडरेट है.
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
अगर आप खरीदार हैं या फिर इन्वेस्टर, तो बाजार की हवा से पता चलेगा कि आने वाला समय केवल प्रीमियम और स्पेसियस हाउसिंग का है. 1 बीएचके और 2 बीएचके में पैसा लगाकर फंसने का दौर अब जा चुका है. रियल एस्टेट एक्सपर्ट का दावा है कि अगले 5 से 10 सालों तक 3 बीएचके, 4 बीएचके और लग्जरी विला ही बाजार को ड्राइव करेंगे.
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