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डार्क पैटर्न का मायाजाल: ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले को हर साल लग रहा ₹28,000 करोड़ का चूना, ऐसे कट रही आपकी जेब

ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स के 'डार्क पैटर्न्स' (Dark Patterns) के कारण भारतीय ग्राहकों को हर साल ₹28,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है. Datum Intelligence की रिपोर्ट में फ्लिपकार्ट और अमेजन को लेकर हुआ बड़ा खुलासा.

डार्क पैटर्न का मायाजाल: ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले को हर साल लग रहा ₹28,000 करोड़ का चूना, ऐसे कट रही आपकी जेब
ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को लगा ₹28,000 करोड़ का चूना!
Photo Credit: Unsplash

मैं अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ही अपने लिए सभी जरूरी सामान खरीदती हूं. लेकिन पिछले कुछ महीनों से पेमेंट के दौरान सर्विस चार्ज,  हिडन चार्ज या हैंडलिंग चार्जेज लगने लगे है और ये कोई छोटा-मोटा चार्ज नहीं बल्कि कई बार 29 रुपये तो कई बार इससे भी ज्यादा की रकम दिखाता है. इसी से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आई है जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे. 

रिपोर्ट में सामने आया है कि भारतीय ऑनलाइन ग्राहक हर साल अपनी जेब से ₹25,000 करोड़ से लेकर ₹28,000 करोड़ रुपये सिर्फ इसलिए गंवा रहे हैं क्योंकि कंपनियां उनके साथ धोखेबाजी कर रही हैं. मार्केट रिसर्च फर्म 'डेटम इंटेलिजेंस' (Datum Intelligence) की ताजी रिपोर्ट 'डार्क पैटर्न्स इन इंडियाज ऑनलाइन मार्केटप्लेसेज' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 

देश के करीब 88 परसेंट ऑनलाइन खरीदार हर महीने बिना जाने हिडन चार्ज, सब्सक्रिप्शन ट्रैप और जबरदस्ती थोपे जाने वाले प्रोडक्ट्स के जाल में फंसकर अपना पैसा गंवा रहे हैं. आइए जानते हैं कि यह पूरा खेल कैसे चलता है.

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क्या है 'डार्क पैटर्न्स' का मायाजाल?

डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) असल में डिजिटल ऐप्स और वेबसाइट्स के ऐसे चालाकी भरे डिजाइन होते हैं, जो ग्राहकों को वो काम करने के लिए मजबूर करते हैं जो वो नहीं करना चाहते. जैसे- पेमेंट पेज पर अचानक कोई एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ देना, जबरदस्ती कोई इंश्योरेंस या कूपन थोप देना, या फिर 'सिर्फ 2 मिनट बचे हैं' कहकर झूठी जल्दबाजी दिखाना. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत का हर ऑनलाइन खरीदार अनजाने में हर महीने ₹78 से ₹87 रुपये इन फर्जी तरकीबों के कारण गंवा रहा है.

पेमेंट स्टेज पर बढ़ा कंपनियों का खेल

रिपोर्ट में सामने आया है कि 63 परसेंट ऑनलाइन पेमेंट करने वाले यूजर्स अब हिडन चार्ज या 'ड्रिप प्राइसिंग' (Drip Pricing) का सामना कर रहे हैं. ड्रिप प्राइसिंग का मतलब होता है कि शुरुआत में प्रोडक्ट की कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन जैसे ही आप आखिरी पेमेंट पेज पर पहुंचते हैं, वहां चुपके से हैंडलिंग फीस, डिलीवरी चार्ज या अन्य शुल्क जोड़ दिए जाते हैं. साल 2024 में यह समस्या 52 परसेंट थी, जो अब बढ़कर 63 परसेंट हो चुकी है. इसके अलावा 73 परसेंट प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों को किसी न किसी तरह का जबरन एक्शन लेने के लिए मजबूर करते हैं.

Amazon सबसे भरोसेमंद, Flipkart पर बढ़ा अविश्वास

इस स्टडी में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर के 12 बड़े प्लेटफॉर्म्स की जांच की गई थी. ई-कॉमर्स सेक्टर में एमेजॉन (Amazon) को 50 परसेंट यूजर्स ने अपनी पहली पसंद बताते हुए सबसे भरोसेमंद माना है. इसके विपरीत, फ्लिपकार्ट (Flipkart) इकलौता ऐसा प्लेटफॉर्म रहा जहां कंपनी पर अविश्वास करने वाले लोग 41 परसेंट भरोसा करने वालों 37 परसेंट से ज्यादा थे. रिपोर्ट में इसका कारण फ्लिपकार्ट द्वारा हर बार की जाने वाली 'ज्यादा वित्तीय वसूली' (Financial Extraction) को बताया गया है.

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ट्रैवल और क्विक कॉमर्स ऐप्स का हाल

ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर की बात करें तो मेकमायट्रिप (MakeMyTrip) को ग्राहकों ने सबसे सुरक्षित माना है, जबकि क्लियरट्रिप (Cleartrip) को सबसे नुकसानदेह ऐप्स की लिस्ट में जगह मिली है. वहीं दूसरी तरफ, तुरंत सामान डिलीवरी करने वाले क्विक कॉमर्स सेगमेंट में बिगबास्केट (BigBasket) का स्कोर सबसे खराब रहा, यानी यहां डार्क पैटर्न्स सबसे ज्यादा पाया. यह सर्वे साल 2026 की पहली तिमाही में देश के 50 शहरों के 2,590 ग्राहकों के बीच किया गया था.

अवेयरनेस पैराडॉक्स: जानकर भी फंस रहे हैं लोग

सर्वे में शामिल 81 परसेंट ग्राहकों ने कहा कि वे इन डार्क पैटर्न्स और धोखेबाजी वाले डिजाइनों के बारे में जानते हैं, लेकिन इसके बावजूद 85 परसेंट ग्राहकों ने माना कि वे इनके जाल में फंसकर गुमराह हो ही जाते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि 74 परसेंट भारतीय ग्राहकों ने कहा कि वे उन ऐप्स को ज्यादा पैसे देने के लिए भी तैयार हैं जो पूरी तरह से ईमानदार और पारदर्शी तरीके से अपनी कीमतें दिखाते हैं.

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