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ट्रंप से भारत को मिला तेल पर बड़ा ऑफर, अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने की डील

India-US 500 billion Trade Deal: भारत ने अमेरिका से अगले पांच सालों में 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने की बड़ी डील की है. ये समझौता तीन बड़े क्षेत्रों, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि पर फोकस करेगा.

ट्रंप से भारत को मिला तेल पर बड़ा ऑफर, अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने की डील
India-US 500 billion Trade Deal: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका की डील के बारे में बताया.

India-US 500 billion Trade Deal: भारत ने अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जिसके जरिए भारत अगले पांच सालों में अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदेगा. इस बड़ी डील की जानकारी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी . इस समझौते की बात करें तो ये तीन बड़े क्षेत्रों ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि पर आधारित होगा. यानी भारत अमेरिका से इन सेक्टरों में बड़े पैमाने पर सामान और सर्विस लेगा. इस डील का मकसद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना है, साथ ही इससे भारत की जरूरतें भी पूरी होंगी और अमेरिका को भी बड़ा बाजार मिलेगा. कुल मिलाकर, ये सौदा दोनों देशों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है और इसका असर वैश्विक व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय भारत के दौरे पर हैं और 26 मई तक देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा करेंगे. इस डील के बारे में जानकारी देते हुए रुबियो ने एक्स पर लिखा कि, "अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और हमारे अमेरिकी राजनयिकों को बहुत धन्यवाद. उनके बेहतरीन काम की बदौलत भारत ने अगले पांच सालों में ऊर्जा, तकनीक और कृषि पर फोकस करते हुए 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की बात कही है. वो सभी राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी जनता की ओर से शानदार काम कर रहे हैं."

भारत को जितना चाहिए, उतना तेल-गैस देगा अमेरिका

इस पूरी डील में सबसे अहम हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है. दरअसल, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा इस्तेमाल करने वाला देश है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है. ऐसे में अमेरिका की तरफ से संकेत साफ हैं कि वो भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को उतना तेल-गैस बेचने के लिए तैयार है, जितनी वो खरीदना चाहता है. अभी अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आ रहा है और अब अमेरिका इस तेल को भारत जैसे बड़े बाजार में बेचने की योजना बना रहा है. 

वेनेजुएला कनेक्शन

इस डील की जियोपॉलिटिक्स को समझने के लिए इसमें आ रहे वेनेजुएला कनेक्शन को समझना भी जरूरी है. जैसा मार्को रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत का दौरा करने वाली हैं. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका की तरफ से भारत को की जाने वाली ऊर्जा सप्लाई की चेन में वेनेजुएला का क्रूड ऑयल एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है.

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डील से चीन को संदेश

इस 500 बिलियन डॉलर की बड़ी डील में टेक्नोलॉजी का हिस्सा भी अहम है और इसे चीन के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इस समझौते से भारत अमेरिका से एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी तकनीक खरीदेगा. इसका फायदा ये होगा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और देश में नई तकनीक तेजी से आएगी. 

अमेरिका फर्स्ट नीति और भारत का मास्टरस्ट्रोक

राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से ट्रेड डेफिसिट को लेकर सख्त नजरिया रखते हैं. भारत का ये 500 बिलियन डॉलर का बड़ा कदम उनकी अमेरिका फर्स्ट नीति के हिसाब से एक स्मार्ट चाल मान सकते हैं अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदकर भारत एक तरफ व्यापार संतुलन करेगा, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप सरकार के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करेगा. इससे आने वाले पांच सालों तक भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी और भी मजबूत रहने की उम्मीद है.

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