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30.63 लाख करोड़ का निवेश, उबर, माइक्रोसॉफ्ट की बढ़ी टेंशन, क्या फेल हो रहा AI का दांव?

Artificial Intelligence Cost: पिछले कुछ सालों में एआई में कंपनियों ने जमकर निवेश किया, लेकिन बदले में रिटर्न उम्मीद के अनुसार नहीं रहा. अब कहीं ना कहीं कंपनियां एआई से अपने कदम पीछे कर रही हैं.

30.63 लाख करोड़ का निवेश, उबर, माइक्रोसॉफ्ट की बढ़ी टेंशन, क्या फेल हो रहा AI का दांव?

Artificial Intelligence Cost: किसी भी बिजनेस के लिए रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट का महत्व सबसे आगे रहता है. चाहे वो कोई शुरुआती कंपनी हो या फिर कोई जायंट. हर कोई अपने निवेश पर तगड़ा रिटर्न बनाना चाहता है. ऐसा ही एक बड़ा निवेश पिछले 2 सालों से लगभग विश्व की बड़ी कंपनियां कर रही हैं. हम बात कर रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की. पिछले 2 सालों से एआई में कंपनियों ने जमकर निवेश किया. पर अब ये गुब्बारा अब धीरे-धीरे फूटता नजर आ रहा है. उबर से लेकर माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां अब ये सोचने पर मजबूर हो रही हैं कि एआई किए हुए भारी भरकम निवेश से कोई बदलाव आ पाएगा या सिर्फ एक बिना किसी काम का खर्च बनकर रह जाएगा. 

एआई में हुआ 320 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश

रिपोर्ट्स और फाइनेंशियल स्टेटमेंट से पता चलता है कि साल 2025 में केवल 4 बड़ी कंपनियां, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और मेटा ने एआई में करीब 320 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. इतने बड़े निवेश के बाद कंपनियों को उम्मीद के अनुसार रिटर्न नहीं मिला है. हाल ही में उबर के सीओओ एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने कहा कि कंपनी ने जितना खर्चा एआई पर किया है, हम कुछ हिस्से को जस्टिफाई नहीं कर पा रहे हैं. कंपनी के अधिकारियों ने इस निवेश को टोकनमैक्सिंग बोलना शुरू कर दिया है. यानी डेवलपर्स एआई कंप्यूट टोकन का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसमें लगे पैसे से प्रोडक्ट में कुछ ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा. अप्रैल 2026 में उबर के सीटीओ प्रवीण नेप्पल्ली नागा ने खुलासा किया था कि कंपनी ने क्लाउड कोड के लिए मिले 2026 का पूरा बजट सिर्फ चार महीनों में ही खर्च कर दिया था. 

कर्मचारी एआई टूल्स का कर रहे जमकर इस्तेमाल, रिटर्न ना के बराबर

एक बात यहां गौर करने वाली है कि कर्मचारी एआई टूल्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी के 5,000 से ज्यादा डेवलपर्स में से 92% हर महीने AI असिस्टेंट का इस्तेमाल करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार अब उबर के करीब 10% कोड को AI ही लिखता है. यानी धीरे-धीरे कंपनी में एआई का इस्तेमाल कम हो रहा है. साथ ही कंपनी के अधिकारी इस बात को नहीं मानते कि एआई के जनरेट किए कोड से यूजर्स के एक्सपीरियंस में कोई फायदा हुआ है.

इस मामले में एक दिलचस्प बात ये सामने आई है कि इसी महीने की शुरुआत में उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने एक अर्निंग्स कॉल के दौरान बताया था कि कंपनी अब एआई में ज्यादा निवेश कर रही है. इसी वजह से कंपनी ने नई भर्ती को रोक दिया है. हालांकि, अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या ये फैसला कंपनी के लिए फायदेमंद साबित होगा या नहीं.

कंपनियां एआई से जुड़े खर्चों को कर रहीं कम

उबर अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो अब एआई में निवेश के मामले में अलर्ट मोड पर है. रिपोर्ट्स हैं कि माइक्रोसॉफ्ट ने एन्थ्रोपिक के क्लाउड कोड के साथ कुछ एआई कोडिंग सब्सक्रिप्शन कम करना शुरू कर दिया है, क्योंकि अब कंपनियां एआई से जड़े खर्चों को कम करने में लगी हुईं हैं. माइक्रोसॉफ्ट के अलावा भाषा सीखाने वाले प्लेटफॉर्म डुओलिंगो ने हाल ही में अपनी पॉलिसी में बदलाव किया. पहले कंपनी कर्मचारियों के प्रदर्शन का आंकलन इस आधार पर कर रही थी कि वे एआई टूल्स का कितना इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन कर्मचारियों ने शिकायत की कि उन पर जबरदस्ती एआई इस्तेमाल करने का दबाव डाला जा रहा था, जबकि इससे उनके काम में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था. इसी वजह से कंपनी को ये पॉलिसी वापस लेनी पड़ी.

एआई इस्तेमाल को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?

एआई एक्सपर्ट अंश मेहरा ने कहा कि कई कंपनियां इस समय बड़ी गलतियां कर रही हैं. कर्मचारी ठीक से एआई का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, वहीं वो अब इस सिस्टम पर डिपेंड हो रहे हैं. इसके बाद ऐसे रिजल्ट सामने आ रहे हैं जिसमें सुधार की गुजाइंश हो. इससे फालतू की कॉस्ट बढ़ती है.

मेहरा ने कंपनियों को सलाह देते हुए कहा कि एआई का सही इस्तेमाल करने के लिए हर डिपार्टमेंट में उन छोटे और कम रिस्क वाले कामों को पहचानना चाहिए, जहां इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके. इसके बाद उन कामों पर अनुभवी कर्मचारियों से एआई टूल्स, जैसे एलएलएम, का टेस्ट करवाना चाहिए. फिर जो भी रिजल्ट आए, उनको अच्छी तरह चेक करना चाहिए. साथ ही, सभी को एआई टूल्स देने से पहले कर्मचारियों को बता देना चाहिए कि कौन सा काम एआई बेहतर कर पा रहा है और कौन सा नहीं.

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