विज्ञापन

र के 12 साल: अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली दो शानदार पहल, जो बनेंगी समृद्धि का आधार

गौरी द्विवेदी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 09, 2026 14:04 pm IST
    • Published On जून 09, 2026 13:44 pm IST
    • Last Updated On जून 09, 2026 14:04 pm IST
र के 12 साल: अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली दो शानदार पहल, जो बनेंगी समृद्धि का आधार

नरेंद्र मोदी की सरकार ने 12 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. इस अवसर पर लिखे अपने पहले लेख में अर्थव्यवस्था की नींव और कारखानों का वर्णन था. यह लेख उसकी सीमाओं के बारे में है. इसमें उन दो दांवों की बात करेंगे जो 2030 के दशक में भारत की आर्थिक स्थिति को आकार देंगे. इनमें से एक भौतिक और पूंजी-प्रधान सेमीकंडक्टर है तो दूसरा है, मुक्त व्यापार समझौतों की एक लहर. इसने भारतीय निर्यातकों के लिए रातोंरात विकसित देशों के दरवाजे खोल दिए हैं. इन दोनों मामलों में मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में योजनाओं को बयानों से आगे बढ़कर जमीन पर उतार दिया है. यह बदलाव ही इस कहानी का सारांश है.

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन कैसा है

चलिए, चिप्स (सेमीकंडक्टर) से शुरुआत करते हैं, क्योंकि यह सबसे चुनौतीपूर्ण काम है. दशकों तक भारत ने सेमीकंडक्टरों का उपभोग तो किया, लेकिन उन्हें बनाया नहीं. दिसंबर 2021 में 76 हजार करोड़ रुपये के कोष और असाधारण रूप से उदार संरचना (केंद्र सरकार द्वारा 50 फीसदी और राज्य सरकार द्वारा 25 फीसदी तक की सब्सिडी, जो निर्माण लागत का 75 फीसदी तक कवर करती है) के साथ शुरू किए गए 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत, अब तक छह राज्यों में दस परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन परियोजनाओं में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश हुआ है.गुजरात के सानंद में माइक्रोन की असेंबली और परीक्षण प्लांट इस तरह की पहली परियोजना है, जो ऑपरेशनल है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की गुजरात के धोलेरा में स्थित फैब, ताइवान की पीएसएमसी के साथ साझेदारी में 91 हजार करोड़ रुपये के निवेश से बनी है, इसका लक्ष्य 2026 के अंत तक पहले सिलिकॉन का उत्पादन करना है. सरकार की योजना के मुताबिक 2026 के अंत तक चार संयंत्र चालू हो जाने चाहिए, ताकि भारत 2029 तक दुनिया के शीर्ष पांच चिप इकोसिस्टम में शामिल हो सके.

इस लक्ष्य को हासिल करने के निश्चित रूप से कई पहलू हैं. भारत की पहली वास्तविक फैब्रिकेशन यूनिट 2028 तक शुरू होने की उम्मीद नहीं है, हमारी आज की उपलब्धियां मुख्य रूप से असेंबलिंग, टेस्टिंग और पैकेजिंग में हैं. ये इस श्रृंखला का कम मुनाफे वाला हिस्सा है. फैब अत्यधिक पानी, बिजली और पूंजी निवेश वाले होते हैं. इस उद्योग में केवल भारत में ही नहीं बल्कि हर जगह समय-सीमा में देर होना आम बात है. इसके बाद भी तथ्य यह है कि सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन चीन-ताइवान की धुरी में विविधता ला रही हैं, भारत इसमें एक अद्वितीय स्थान रखता है. अमेरिका-चीन संबंधों में आई दरार की वजह से डिजाइन और पैकेजिंग क्षमता का निर्यात भारत की ओर हुआ है. भारत अंग्रेजी बोलने वाले इंजीनियरों और आकर्षक आर्थिक प्रोत्साहनों के साथ इस भू-आर्थिक अनुकूल परिस्थिति का फायदा उठाने का अवसर दे रहा है. हाल ही में क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन किए गए 2एनएम से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय उद्योग जगत इस निवेश को गंभीरता से ले रहा है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में 76 हजार करोड़ रुपये के कोष भारत सेमीकंडक्टर मिशनशुरू किया था.

नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में 76 हजार करोड़ रुपये के कोष 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन'शुरू किया था.

यदि हम प्रस्तावित समय सीमा में काम पूरा कर लेते हैं तो इसका परिणाम क्रांतिकारी होगा, भारत अपनी सबसे महंगी रणनीतिक निर्भरताओं में से एक से छुटकारा पाएगा, जिससे हर साल अरबों डॉलर के आयात बिल में भारी कमी आएगी और रक्षा प्रणालियों से लेकर ऑटोमोबाइल तक हर चीज को अगली वैश्विक चिप की कमी से बचाया जा सकेगा. इससे भी बढ़कर, एक कार्यशील फैब इकोसिस्टम इलेक्ट्रॉनिक्स श्रृंखला के हाई वैल्यू वाले हिस्से को भारतीय धरती पर स्थापित करेगा, वही स्तर जो, जिसका पहले लेख में उल्लेख है यानी विनिर्माण से अधिक असेंबलिंग पर आधारित है. 

मुक्त व्यापार समझौते से भारत को क्या मिलेगा

व्यापार के क्षेत्र में सरकार अपनी सबसे बड़ी जीत का दावा कर सकती है. भारत को सालों तक संरक्षणवादी और मुक्त व्यापार समझौतों से कतराने वाले देश के रूप में चित्रित किया गया है. लेकिन पिछले दो साल इस लिहाज से परिवर्तनकारी रहे हैं. भारत-ब्रिटेन सीईटीए पर जुलाई 2025 में दस्तखत हुए. इससे द्विपक्षीय व्यापार में सालाना 34 अरब डॉलर की वृद्धि होने का अनुमान है. भारत-ईएफटीए साझेदारी अक्टूबर 2025 में लागू हुई. इससे 15 सालों में 100 अरब डॉलर के निवेश की बात की गई है. इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण बात जनवरी 2026 में हुई, वह थी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए). यह समझौता करीब दो दशक की बातचीत के बाद संपन्न हुआ. इसे 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील' कहा जाता है. इस समझौते से करीब दो अरब उपभोक्ता कवर होंगे. यह यूरोपीय संघ की ओर से किया गया अब तक का सबसे बड़ा समझौता है. ओमान, न्यूजीलैंड और फरवरी 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अंतरिम ढांचे को जोड़ने के बाद, भारत के पास अब दर्जनों देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) हैं. इसके बाद से भारतीय निर्यातकों के लिए पूरा यूरोपीय बाजार प्रभावी रूप से खुल गया है.

भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने की घोषणा की, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने की घोषणा की, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

यह महत्वपूर्ण है और पिछले लेख को और पुष्ट करता है. पीएलआई योजना के तहत बने विनिर्माण क्षमता को बाजार की जरूरत है. वह बाजार मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) उपलब्ध कराते हैं. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारों की जरूरत है.ईएफटीए की पूंजी और यूरोपीय संघ की रक्षा-प्रौद्योगिकी साझेदारी इन्हें वह उपलब्ध कराती है. सभी घटक एक दूसरे के अनुकूल डिजाइन किए गए हैं.

एफटीए के दो पहलू हैं. वे भारतीय उत्पादकों के लिए विदेशी बाजार खोलने के साथ-साथ उन्हें प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करते हैं. इसका लाभ सभी क्षेत्रों को असमान रूप से मिलेगा. अमेरिकी ढांचा अंतरिम है, टैरिफ दबाव की छाया में तैयार किया गया है. यह अभी तक पूरी तरह से स्थापित नहीं हुआ है.

कुल मिलाकर, सिलिकॉन और एफटीए समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था का पूरा स्वरूप बदल सकते हैं. ये समझौते घरेलू मांग पर आधारित अर्थव्यवस्था को निर्यात और प्रौद्योगिकी के महाशक्ति केंद्र में बदल सकते हैं, जो दुनिया के सबसे आकर्षक बाजारों से जुड़ा हो. यदि दोनों ही पहलू सही ढंग से लागू हो जाएं तो भारत केवल सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की जरूरी कड़ी बन जाएगा. यही वास्तविक आर्थिक शक्ति का स्वरूप है.

(डिस्क्लेमर: गौरी द्विवेदी एनडीटीवी में राजनीतिक अर्थव्यवस्था की कार्यकारी संपादक हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.) 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Narendra Modi News, Semiconductor, Free Trade Agreement
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com