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क्या है वुशू गेम जिसमें बिहार की स्लम बस्ती की दो बेटियों ने जीता गोल्ड मेडल, अब खेलेगी नेशनल

माहिरा और संध्या बेहद गरीब परिवार की बेटी है. बताया जाता है कि महिरा के पिता सब्जी बेचने का काम करते हैं. जबकि संध्या के पिता मजदूरी करते हैं. लेकिन इसके बावजूद अपने सपने को पूरा करने के लिए दोनों बच्चियां वुशू का प्रशिक्षण लेती है. 

क्या है वुशू गेम जिसमें बिहार की स्लम बस्ती की दो बेटियों ने जीता गोल्ड मेडल, अब खेलेगी नेशनल
मुजफ्फरपुर की दो बेटियों ने वुशू गेम में जीता गोल्ड (NDTV)
Bihar News:

बिहार के भागलपुर खेल भवन में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर और जूनियर वुशू चैंपियनशिप 2026 में 'अप्पन पाठशाला' की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है. इस प्रतियोगिता में मुजफ्फरपुर की अप्पन पाठशाला की तरफ से भाग लेने वाली दोनों छात्राओं माहिरा कुमारी और संध्या कुमारी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर संस्थान और क्षेत्र का नाम रोशन किया है. इस दोहरे स्वर्ण पदक के साथ ही दोनों खिलाड़ियों का चयन अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए हो गया है.

गरीब परिवार की बेटियां

सबसे बड़ी बात है कि माहिरा और संध्या बेहद गरीब परिवार की बेटी है. बताया जाता है कि महिरा के पिता सब्जी बेचने का काम करते हैं. जबकि संध्या के पिता मजदूरी करते हैं. लेकिन इसके बावजूद अपने सपने को पूरा करने के लिए दोनों बच्चियां वुशू का प्रशिक्षण लेती है. 

अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए माहिरा और संध्या ने इसका पूरा श्रेय अपने वुशू गुरु सुनील कुमार, अजीत कुमार सिंह और  खेलो इंडिया से गुरु करण कुमार को दिया. छात्राओं ने कहा, "हमारे गुरुजनों के कुशल मार्गदर्शन, बेहतरीन तकनीक और दिन-रात की मेहनत का ही यह परिणाम है कि आज हम इस मुकाम पर पहुंच पाई हैं."

'अप्पन पाठशाला' के संस्थापक सुमित कुमार ने बताया कि "यह जीत हमारी छात्राओं के कठिन परिश्रम, अटूट समर्पण और उनके कभी न हार मानने वाले जज्बे का परिणाम है. इस सफलता के पीछे हमारे वुशु प्रशिक्षकों का कुशल मार्गदर्शन है, जिन्होंने बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया."

उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि 'अप्पन पाठशाला' केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल और अन्य क्षेत्रों में भी बच्चों के सर्वांगीण विकास (Overall Development) के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हमारा  पूरा विश्वास है कि माहिरा और संध्या राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वर्ण पदक जीतकर देश में अपना परचम लहराएंगी.

क्या है वुशू गेम

वुशू एक तरह का चीनी मार्शल आर्ट खेल है. यह इंटरनेशनल लेवल पर काफी लोकप्रिय है. इसे सामान्य भाषा में कुंग-फू भी कहा जाता है. वुशू इसी खेल का एक फॉर्मेट है. वुशू शब्द भी चाइनीज भाषा से बनी है वु और शू, वु का मतलब युद्ध और शू का मतलब कला होता है. यानी युद्ध की कला. कहा जाता है वुशू खेल को भारत में स्थापित करने के लिए आनंद मकरानी ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने इस खेल की नींव देश में रीखी थी. जिसे भारत सरकार से भी मान्यता दी गई है. इस खेल के लिए वुशू एसोसिएशन ऑफ इंडिया का गठन भी किया गया है.

बता दें वुशू खेल में पूजा कादियान ने इतिहास रचा था जब उन्होंने वुशू विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था. वह इस खेल में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी थी.

वुशू के दो फॉर्मेट में खेली जाती है, जिसमें एक को सांडा कहा जाता है. इसमें दो फाइटर्स आपस में मुकाबला करते हैं, जिसमें कोई हथियार का इस्तेमाल नहीं होता है. जबकि एक फॉर्मेट होता है तोओलू इसमें तलवार, लाठी, भाला जैसे हथियार की कला दिखाई जाती है.

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