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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम ने ओलिंपिक में पदक जीता है. 1980 में भारत ने स्वर्ण पदक जीता था. उसके बाद से 40 साल तक कोई पदक नहीं जीता. 41वें साल में टोक्यो ओलंपिक में भारत ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक जीता है. भारत की टीम आज जर्मनी पर हावी रही खासकर दूसरे हिस्से में और भी हावी हो गई लेकिन इस जीत के बाद प्रचार के स्पेस में हावी होने की होड़ शुरू हो गई.
  • सत्रह दिनों से पेट्रोल और डीज़ल के दाम नहीं बढ़े हैं. राहत की इतनी बड़ी ख़बर हेडलाइन नहीं बन सकी है क्योंकि 17 दिन पहले जो दाम दे रहे थे आप वही दे रहे हैं. दिल्ली के लोग 101 रुपये लीटर पेट्रोल भराने को लेकर आदी हो चुके हैं. दूसरी जगहों के लोगों को भी 110 रुपये लीटर खरीदने का अच्छा ख़ासा अभ्यास हो चुका होगा. इतनी कमाई आपकी बढ़ी नहीं है जितना महंगाई बढ़ गई है लेकिन आप अथक परिश्रम कर रहे हैं और टैक्स दे रहे हैं. अपने खर्चे और इच्छाओं को मार कर महंगा पेट्रोल डीज़ल और रसोई गैस खरीद रहे हैं ताकि सरकार के पास टैक्स जाए. लेकिन प्रधानमंत्री जब जीएसटी की संख्या को अगस्त के अमृत महोत्सव में शामिल करते हैं तब पेट्रोल डीज़ल के टैक्स को छोड़ देते हैं.
  • टोक्यो में ओलिंपिक के साथ-साथ भारत में एक और ओलिंपिक चल रहा है. यह ओलिंपिक है ओलिंपिक को राजनीतिक रंग देने और सारी कामयाबी में एक नेता की मौजूदगी सुनिश्चित करने का. खेल भावना और देश भावना के बहाने चल रहे इस ओलिंपिक को गलत और सही की नज़र से ज्यादा इस बात के लिए देखना चाहिए कि कहीं इसके बहाने किसी और खिलाड़ी की प्रतिभा पीछे तो नहीं छूट जा रही है. टोक्यो ओलंपिक की कामयाबी को देश की कामयाबी के नाम पर आगे करते हुए किस तरह उससे राजनीतिक दल खुद को जोड़ रहा है इसे देखना चाहिए. खेल को समझने के लिए काफी कुछ मिलेगा. भारत सरकार ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया Cheer4india, ताकि आप सभी इस नारे के साथ खिलाड़ियों को जोश बढ़ाते रहें. 
  • फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ANSSI ने पुष्टि कर दी है कि मीडिया पार्ट के दो पत्रकारों के फोन में पेगासस था. इस सुरक्षा एजेंसी ने इन पत्रकारों के फोन की फोरेंसिक जांच की है.
  • पेगसास जासूसी कांड की जांच में एक नया मोड़ आ गया है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले की जांच का ऐलान किया था लेकिन इससे एक कदम आगे जाते हुए बंगाल की सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है. दिल्ली आने से पहले ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया. इस न्यायिक आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर को बनाया गया है. कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य भी इस आयोग के सदस्य होंगे.
  • अगर आप सरकार से सवाल करना चाहते हैं, आलोचना करना चाहते हैं तो पहले एक काम कीजिए. आयकर विभाग और प्रत्यर्पण निदेशालय जिसे ED कहते हैं उनके अधिकारियों से पूछ लीजिए कि कितना तक लिखें तो छापा पड़ेगा और कितना तक न लिखें तो छापा नहीं पड़ेगा.
  • पेगसस जासूसी कांड में पत्रकारों के अलावा अब विपक्ष के नेताओं के भी नाम आ गए हैं. दि वायर ने रविवार के बाद आज एक और रिपोर्ट छापी है जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि जासूसी के लिए 300 फोन नंबरों की एक सूची बनाई गई थी जिसमें राहुल गांधी के भी दो नंबर शामिल हैं. इसी सूची में राहुल से जुड़े 9 और नंबर डाले गए थे लेकिन राहुल ने नंबर बदल लिया था. राहुल ने वायर से कहा है कि उनके व्हाट्सऐप पर अतीत में संदिग्ध मैसेज आए हैं. जासूसी के लिए ही ऐसा किया जाता है. राहुल ने वायर से कहा है कि “यदि आपकी जानकारी सही है, तो इस स्तर की निगरानी व्यक्तियों की गोपनीयता पर हमले से आगे की बात है. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए.” राहुल के अलावा उनके सहयोगी अलंकार सवाई, सचिव राव का नाम भी सूची में है. राहुल गांधी के सात गैर राजनीतिक दोस्तों के भी नाम हैं.
  • कई मैसेज में देखा कि श्मशान से तस्वीरें लेकर दानिश ने दुनिया भर में भारत की छवि को नुक़सान पहुँचाया. श्मशान से पत्रकारिता नहीं करनी चाहिए.
  • यूपी सरकार कानून में इतना लिख दे कि जिनके दो से अधिक बच्चे होंगे वे नए कानून लागू होने के बाद चुनाव नहीं लड़ सकेंगे तो फिर देखिए क्या होता है. सिर्फ इतना लिख देने भर से चौक-चौराहों की पान की गुमटियों पर जितने लोग आबादी को लेकर बहस कर रहे होंगे, बहस छोड़ भाग खड़े होंगे. यही नहीं उनके विधायक जी भी कानून के इन समर्थकों को अपने बोलेरो से नीचे उतार देंगे. टाइम्स आफ इंडिया में अतुल ठाकुर और रेमा नागराजन की रिपोर्ट छपी है कि बीजेपी के पचास फीसदी विधायक ऐसे हैं जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं. क्या इसी कारण प्रस्तावित कानून में ऐसे विधायकों के चुनाव लड़ने पर रोक की बात नहीं है.
  • मौसम विभाग की आलोचना हो रही है कि उसकी बताई कई तारीखों पर दिल्ली में मानसून नहीं आया. दिल्ली के लोगों ने पेट्रोल के दाम कम होने का इंतज़ार छोड़ मानसून का शुरू कर दिया है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के विद्वानों के बीच यह दलील चल रही है कि दिल्ली में पेट्रोल 101 रुपया भी हो रहा है तो विकास भी तो हो रहा है. तो क्या शहडोल और गंगानगर में भी दिल्ली से ज़्यादा विकास हो गया है? मध्य प्रदेश का शहडोल जिला देश के अति पिछड़े ज़िलों में आता है. यहां के लोग 111 रुपया 71 पैसे लीटर पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. गंगानगर के लोग 112 रुपया 49 पैसा लीटर पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. यह अहसास होना चाहिए कि पेट्रोल के दाम बढ़ने से आम लोगों पर कितना बोझ बढ़ा है. ऐसा है तो सरकार विज्ञापन छाप दे कि 110 रुपया लीटर पेट्रोल देश के लिए ज़रूरी है. जैसे टीकाकरण के विज्ञापन छापे जा रही है. 
  • भारत की आम जनता ने एक रिकार्ड बनाया है. आम खाने का नहीं बल्कि महंगा पेट्रोल खरीद कर सरकार को कई लाख करोड़ टैक्स देने का रिकार्ड. ये वो रिकार्ड है जो अमरीका की पूरी आबादी नहीं बना सकती. उपभोक्तावादी अमेरिकी लोग इस त्याग को समझ ही नहीं सकते हैं. अमेरिकी लोगों को अपनी सरकार से मंदी के संकट में 220 लाख करोड़ का पैकेज मिला. जिनकी नौकरी नहीं गई है उन्हें भी तीन तीन हज़ार डॉलर का चेक मिला. भारतीय रुपये में दो लाख होता है. परिवार के हर सदस्य को मिला. ऐसे लोगों ने चेक ले भी लिया. आध्यात्मिक भारत के लोगों को ऐसा कुछ नहीं मिला, मिलता भी तो शायद वे ठुकरा देते. क्या पता इसलिए भी सरकार ने नहीं दिया. वक्त आ गया है कि भारत के सभी पेशे के बर्बाद लोग अमेरिका की निंदा करें कि हम बर्बाद हो गए लेकिन हमने तो डोल नहीं लिया. उसकी जगह लोन लिया. भारत को इस हीन भावना से निकलना ही होगा, अमेरिका की निंदा करनी ही होगी. मंत्रियों को भी ट्वीट कर भारत की मिडिल क्लास जनता को इस बात का श्रेय देना चाहिए कि सरकार से कुछ न मांगने के लिए आभार. और तो और आपके सहयोग से प्रेरित होकर हम पेट्रोल और डीज़ल के दाम और बढ़ाएंगे. 
  • केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन पिछले साल हाथरस में हुए बलात्कार और हत्या के एक केस को कवर करने जा रहे थे. पिछले साल अक्टूबर में सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन पर UAPA की दो धाराएं लगा दी गईं. राजद्रोह की भी धारा लगाई गई है. इस केस में अतीक उर्र रहमान, मसूद अहमद और आलम को भी गिरफ्तार किया गया है. सिद्दीक कप्पन की मां 18 जून को गुजर गईं. सिद्दीक ने मथुरा कोर्ट में जमानत याचिका लगाई है जिसकी सुनवाई 5 जुलाई को होगी. अपने आवेदन में कप्पन ने कहा है कि मैं पत्रकार हूं. मैंने भारतीय प्रेस परिषद के परिभाषित दायरे से बाहर जाकर कुछ भी गलत नहीं किया है, मैं निर्दोष हूं. 
  • टीका अभियान को लेकर कुछ सवाल उठ रहे हैं. क्या इसे सफल बनाने के लिए कुछ राज्यों में कुछ दिनों से टीके की रफ्तार कम की गई? ताकि टीका बचा कर 21 जून को लगाया जाए जिससे कि नंबर बड़ा लगे? दूसरा क्या सारा मकसद 21 जून को एक रिकार्ड बनाना ही था? अगर नहीं था तो फिर 22 जून को सब कुछ ठंडा क्यों पड़ गया? 22 जून को उसका आधा भी उत्साह नहीं दिखा. उत्साह नहीं था या टीका नहीं था? 21 जून को चार बजे तक 47 लाख टीके लग चुके थे. 22 जून को करीब 6 लाख 23 लाख टीके ही लग पाए थे. चार बजे तक. इतने लोगों के मरने और अर्थव्यवस्था के तबाह हो जाने के बाद भी अगर इस अभियान को ईवेंट मैनेजमेंट की तरह पेश करना था तब इसका मतलब यही है कि हम कोविड को लेकर हेडलाइन हड़पने की मानसिकता से आगे नहीं बढ़ सके हैं. उसकी भी विडंबना देखिए कि वो हेडलाइन पुरानी पड़ चुकी है.
  • आज किसी को FOMO तो नहीं हुआ ? FOMO का मतलब होता है 'फियर ऑफ मिसिंग आउट.' मतलब आपको लग रहा है कि पार्टी चल रही है, लोग हंस बोल रहे हैं मगर कोई आपकी तरफ नहीं देख रहा है. आपको लगता है कि सभी आपको इगनोर मार रहे हैं. आज योग वालों को कहीं ऐसा नहीं तो लगा कि चैनलों पर उन्हें कम जगह मिली या टीका वालों को लगा कि योग वालों को ज्यादा मिली, उन्हें कम जगह मिली. या उन दोनों की जगह नेताओं को ज्यादा जगह मिल गई. 
  • भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं. जब भी पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, हाहाकार मचता है. उसके बहुत दिनों के बाद प्रधान का बयान आता है. उनके बयान का पैटर्न ऐसा होता है कि दाम बढ़ने के प्रधान कारण का पता नहीं चलता. सिर्फ इतना पता चलता है कि ये प्रधान का बयान है. कौन सा कारण प्रधान है, ये पता नहीं चल पाता है. हमने सोचा कि उनके कई बयानों से प्रधान कारणों का पता लगाया जाए ताकि आप गर्व कर सकें कि आप 100 रुपये लीटर पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. प्रधान के बयानों की क्रोनोलोजी देखेंगे तो कारणों की प्रधानता समझने में आसानी होगी.
  • भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं. जब भी पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, हाहाकार मचता है. उसके बहुत दिनों के बाद प्रधान का बयान आता है. उनके बयान का पैटर्न ऐसा होता है कि दाम बढ़ने के प्रधान कारण का पता नहीं चलता. सिर्फ इतना पता चलता है कि ये प्रधान का बयान है. कौन सा कारण प्रधान है, ये पता नहीं चल पाता है. हमने सोचा कि उनके कई बयानों से प्रधान कारणों का पता लगाया जाए ताकि आप गर्व कर सकें कि आप 100 रुपये लीटर पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. प्रधान के बयानों की क्रोनोलोजी देखेंगे तो कारणों की प्रधानता समझने में आसानी होगी.
  • शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना ग़ैर कानूनी नहीं है और न ही आतंकी कार्रवाई है. भड़काऊ भाषण और चक्का जाम करना ऐसे अपराध नहीं हैं कि Unlawful activities prevention act (UAPA) की संगीन धाराएं लगा दी जाएं. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का यह सार दिल्ली पुलिस के अलावा उन लोगों के सामने आइने की तरह खड़ा है जो सिर्फ इसी बात के लिए अभियान चला रहे थे कि नागरिकता कानून के विरोधी आतंकी साज़िश कर रहे थे. दिल्ली दंगों के साज़िशकर्ता हैं. गोदी मीडिया चैनलों के स्क्रीन के आगे बैठकर आपने जिन छात्रों के बारे में ये सब कहा या सोचा आज उन्हीं के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी करते हुए करते हुए ज़मानत दे दी.
  • गणित में कमज़ोर होने के कारण तय नहीं कर पा रहा हूं कि कौन सी ख़बर बड़ी है. राम का नाम जुड़ा होने का कारण 5 मिनट में ज़मीन की कीमत 2 करोड़ से 18 करोड़ हो गई, ये ख़बर बहुत बड़ी है या पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी कंपनी के 4000 करोड़ के शेयर एक दूसरी कंपनी को दे दिए, ये खबर बड़ी है. या तीसरी ख़बर इन दोनों से भी बड़ी है कि भारतीय बैंकों को 5000 करोड़ से अधिक का चूना लगाकर भारत से भाग गए बड़ोदरा के कारोबारी संदेरसा ने तेल कंपनी बनाकर भारत की सरकारी कंपनियों को पांच हज़ार करोड़ का कच्चा तेल एक दूसरी कंपनी के ज़रिए बेच दिया. तो आपको तय करना है 18 करोड़ का कथित घोटाला, 4000 करोड़ और 5000 करोड़ का कथित घोटाला इन तीनों में से कौन बड़ा है. तय करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आस्था की कोई कीमत नहीं होती. काफी समय तक सोचता रहा कि कहां से शुरू करूं. राम मंदिर के लिए ज़मीन ख़रीदने का एक मामला सामने आया है जिसके कई किरदार मामला सामने आने के बाद सामने नहीं आ रहे हैं. अगर कुछ गड़बड़ नहीं है तो सौदा में शामिल कई किरदार मीडिया के सामने क्यों नहीं आते? जिस मंदिर का भूमि-पूजन सबके सामने हुआ, एक एक बात पूरे देश को बताई गई, उस मंदिर के लिए ज़मीन के मामले से जुड़े किरदार पर्दे के पीछे क्यों छिपे रहे.
  • अक्सर आपने देखा होगा कि क्लास रुम में जो छात्र होमवर्क कर नहीं जाता है वो इसी जुगाड़ में रहता है कि मास्टर की नज़र उस पर न पड़े और जल्दी कक्षा ख़त्म होने की घंटी बज जाए. लगता है सरकार की भी यही हालत हो गई है. गोदी मीडिया कोशिश तो कर रहा है कि डिबेट का कोई ऐसा टॉपिक मिल जाए कि नया हंगामा खड़ा हो, जनता उसमें उलझ जाए मगर हो नहीं पा रहा है.
  • यह सही है कि इस साल जैसा ऑक्सीजन की सप्लाई का संकट पहले कभी नहीं हुआ लेकिन यह भी सही है कि इसी सरकार के कार्यकाल में भारत के तीन राज्यों में ऑक्सीजन का संकट हुआ था. हमने उन दुर्घटनाओं से क्या सिखा, ऑक्सीजन की सप्लाई चेन को पहले से कितना बेहतर बनाया यह सब पूछना बेकार है क्योंकि ढंग से एक जगह से कोई जवाब नहीं मिलता है.
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