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अखिलेश शर्मा

पत्रकारिता में पिछले 24 साल से सक्रिय अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक और प्राइम टाइम एंकर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय लोकतंत्र, राजनीतिक अर्थव्यवस्था तथा दलीय राजनीति से जुड़े विषयों में उनकी गहन दिलचस्पी है। पिछले डेढ़ दशक से बीजेपी से जुड़ी ख़बरें कवर कर रहे हैं।

  • देश भर में मॉब लिचिंग की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद दोषियों को सजा दिलाने में तेज़ी और कड़े से कड़ा दंड दिलाने के लिए कानूनों में बदलाव पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.
  • राहुल का पीएम उम्मीदवार बनना इतना आसान नहीं है. अगर संभावित सहयोगियों की बात करें तो इनमें कई खुद पीएम बनने की कतार में हैं. जैसे ममता बनर्जी, मायावती, शरद पवार आदि.
  • मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के पहले अविश्वास प्रस्ताव के लिए सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं. बीजेपी चुनावी साल में इसे एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है. अभी लोकसभा में स्पीकर को छोड़ कर 533 सदस्य हैं और 11 सीटें खाली हैं. एनडीए के पास 312 सांसद हैं जो बहुमत के आंकड़े 267 से काफी ज्यादा है.
  • नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान शुक्रवार को होगा. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मॉनसून सत्र के पहले ही दिन विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को मंजूर कर लिया. पिछले 15 साल में यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है, और इससे पहले 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव आया था, जो गिर गया था. 2008 में मनमोहन सिंह सरकार न्यूक्लियर डील पर विश्वास प्रस्ताव लाई थी और जीत गई थी.
  • 2019 में विपक्ष के महागठबंधन में प्रधानमंत्री का एक और ताकतवर दावेदार सामने आया है. वह हैं बीएसपी प्रमुख मायावती. लोकसभा चुनावों की तैयारी के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं के पहले सम्मेलन में कल लखनऊ में नवनियुक्त राष्ट्रीय कॉआर्डिनेटर वीर सिंह और जय प्रकाश सिंह ने कहा कि अब बहनजी के प्रधानमंत्री बनने का समय आ गया है. इन नेताओं ने कहा कि कर्नाटक में कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनवाने के बाद मायावती ताकतवर नेता के रूप में उभरी हैं. वे अकेली दबंग नेता हैं जो मोदी के विजय रथ को रोक सकती हैं. जयप्रकाश सिंह तो एक कदम आगे चले गए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में कभी कामयाब नहीं होंगे. उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपने पिता की तरह नहीं, बल्कि मां सोनिया गांधी की तरह दिखते हैं जो कि विदेशी हैं. इसीलिए वे कभी भी पीएम नहीं बन पाएंगे.
  • गरीबों, किसानों, बेरोजगारों, दलितों, मजदूरों, पिछड़ों के मुद्दे जैसे कहीं पीछे छूट गए हैं और देश में सिर्फ एक ही मुद्दा बच गया है- हिंदू-मुसलमान का. देश की दो सबसे बड़ी पार्टियां हिंदू और मुसलमान के सवाल पर आपस में उलझी हुई हैं. याद नहीं आता कि राजनीतिक शब्दावली में हिंदू-मुसलमान शब्दों का इतने दुस्साही ढंग से खुलकर इस्तेमाल आखिरी बार कब किया गया था. पीएम नरेंद्र मोदी तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि वो केवल मुसलमान पुरुषों की पार्टी है या उसे मुस्लिम महिलाओं की भी चिंता है? यही नहीं वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस पुराने बयान की भी याद दिला रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का भी है.
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के हिंदू पाकिस्तान बयान से उठा विवाद अब कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन गया है. बीजेपी की मांग है कि उनके बयान के लिए राहुल गांधी माफी मांगें जबकि कांग्रेस ने खुद को थरूर के बयान से अलग कर लिया.
  • कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज मुस्लिम बुद्धिजीवियों और उदारवादियों के एक समूह से चाय पर चर्चा की. यह एक दिलचस्प घटनाक्रम है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस और मुसलमानों के रिश्तों को लेकर खासी टीका टिप्पणियां हुई हैं.
  • मोदी सरकार से नाराज़ किसानों को मनाने की ज़िम्मेदारी अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली है. पीएम मोदी देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों के बीच जाकर उनके लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे. इनमें सबसे बड़ा फैसला चार जुलाई को किया गया जिसमें खरीफ की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम पचास फीसदी बढ़ाना है. हालांकि सरकार के दावे और हकीकत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं.
  • 'जो हमें नुकसान पहुंचाएगा, उसका ही नुकसान होगा.' अपनी पार्टी जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नीतीश के ये बोल बीजेपी को साफ संदेश है. यह उस नारे की याद दिलाता है जो राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव के वक्त या फिर पार्टियों में अंदरूनी विभाजन के वक्त लगाते हैं. वो नारा होता है- 'जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा.'
  • सोशल मीडिया पर फैलता अफवाहों का जाल समाज के ताने-बाने को बुरी तरह से तहस-नहस कर रहा है. लोग आंखें मूंद कर व्हाट्सऐप या ऐसे ही दूसरे प्लेटफॉर्मस पर आई झूठी बातों, फर्जी खबरों और अफ़वाहों पर भरोसा कर एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं.
  • पीएम मोदी कहते हैं कि महागठबंधन की तुलना 1977 और 1989 से करना ठीक नहीं है क्योंकि 77 में विपक्ष आपातकाल के खिलाफ एक हुआ था तो वहीं 89 में बोफोर्स के भ्रष्टाचार के खिलाफ.
  • विपक्षी पार्टियों के नेताओं में प्रधानमंत्री पद के लिए होड़ और दौड़ शुरू हो गई है. कम से कम बयानबाजी के दौर से तो ऐसा ही लगता है. कहते हैं एक अनार सौ बीमार, लेकिन प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर फिलहाल तो एक अनार दो बीमार की बात ही लगती है.
  • सितंबर 2016 में पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में घुसकर आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त करने और दर्जनों आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को मारने की कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक का फुटेज आखिरकार सामने आ गया है. उड़ी आतंकवादी हमले में 18 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद यह सैनिक कार्रवाई की गई थी. स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी कैंपों पर कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई में दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक और आतंकवादी मारे गए थे.
  • क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारेंगे? यह सवाल इसलिए क्योंकि बीजेपी के साथ उनकी खटपट शुरू हो गई है. सीटों के बंटवारे को लेकर ज़ोर-आज़माइश हो रही है. एक-दूसरे पर बयानों के तीखे तीर चलाने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसी बीच नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद को फोन कर दिया. बताया गया कि बातचीत का मुद्दा लालू की सेहत थी. लेकिन इससे बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सेहत पर सवाल उठ गए. 
  • क्या अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष स्तर पर कोई खिचड़ी पक रही है? या फिर सिर्फ चुनाव नजदीक देख कर एक बार फिर बयानों की गर्मी दिख रही है? वैसे तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती आई है कि वो राम मंदिर बनाने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा या तो सभी पक्षों की आपसी सहमति से या फिर अदालत के आदेश के बाद ही होगा. लेकिन सोमवार को अयोध्या में हुए संत सम्मेलन में भगवा वस्त्रधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संत समाज से राम मंदिर के निर्माण में हो रही देरी को लेकर कड़वी बातें सुननी पड़ी है.
  • तैंतालीस साल पहले रात का स्याह अंधेरा लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पोत गया था. अपने भविष्य को लेकर आशंकित इंदिरा गांधी ने 1947 की आजादी के बाद पहली बार नागरिकों की आजादी छीनने का काम किया. सभी देशवासियों के मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए. विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. प्रेस पर अकुंश लगा दिया गया. दिल्ली की फ्लीट स्ट्रीट कहे जाने वाले बहादुरशाह जफर मार्ग पर अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई, ताकि अगले दिन अखबार न निकल सके. अगले दिन हर अखबार के दफ्तर में एक सेंसर अफसर बैठा दिया गया जिसका काम हर खबर की पड़ताल करना था कि उसमें इंदिरा गांधी या सरकार के खिलाफ कुछ न लिखा हो. इंदिरा गांधी ने यह कदम खुद को मजबूत करने के लिए उठाया.
  • कांग्रेसी नेताओं के आत्मघाती बयानों का सिलसिला जारी है. हिंदू आतंकवाद के बाद अब बारी है जम्मू-कश्मीर की जिसे लेकर कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने बयान दे डाले. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ के बयानों से कांग्रेस घिर गई है. अब पार्टी को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय पर कल के भाषण के बाद अब नई बहस शुरू हो गई है. क्या कांग्रेस ने तीखा विरोध कर जल्दबाजी तो नहीं की. कम से कम प्रणब दा के भाषण के बाद आई कांग्रेस और अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया तो यही बता रही है. हालांकि एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि प्रणब मुखर्जी आखिर संघ मुख्यालय क्यों गए.
  • लोकसभा उपचुनावों की करारी हार ने बीजेपी के मिशन 2019 पर सवालिया निशान लगा दिया है. नए सहयोगी मिलना तो दूर की बात, मौजूदा सहयोगी दलों ने ही आंखें दिखाना शुरू कर दिया है.
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