EXCLUSIVE: मॉन्डो ट्रैक और सही विंड-स्पीड होती तो कल ही टूट जाता 10 सेकेंड का बैरियर: गुरिंदरवीर

Gurindervir Gingh EXCLUSIVE: गुरिंदरवीर को अनिमेश कुजुर से कांटे की टक्कर मिली. कुजुर के नाम 10.18 सेकेंड का नेशनल रिकॉर्ड पहले से था. शुक्रवार को गुरिंदरवीर ने पहले सेमीफाइनल में 10.07 से उसे तोड़ा. इसके बाद उन्होंने 10.15 और फिर 10.09 सेकेंड का समय निकालने वाले पहले भारतीय बन गए

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Gurindervir Gingh EXCLUSIVE: भारत के इतिहास के सबसे तेज फर्राटा धावक गुरिविंदर सिंह

पंजाब के गुरिंदरवीर सिंह (Gurindervir Singh) हाल ही में 100 मी. फर्राटा में भारत के सबसे तेज धावक बने हैं, लेकिन 10.09 सेकेंड में रेस पूरी कर इतिहास रचने के बावजूद गुरिंदरवीर सिंह कहते हैं कि वह सबसे टैलेंटेड एथलीट नहीं हैं. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि दुनिया में कहा जाता रहा है कि 100 मीटर की रेस के लिए भारतीय एथलीटों का जीन्स सही नहीं है, लेकिन वह इस बात को गलत साबित करना चाहते हैं. गुरिंदरवीर सिंह ने NDTV संवाददाता विमल मोहन से SUPER EXCLUSIVE बात करते हुए कहा कि वो इस धारणा को तोड़ना चाहते हैं. उन्होंने अपने बचपन और कुछ ही वक्त पहले के संघर्ष के दौर से लेकर मौजूदा कामयाबी पर खुलकर बातें कीं- 

सवाल: आपने जो कारनामा किया है उसपर यकीन कर पाना मुश्किल होता है. आख़िर में फ़िनिश लाइन पर आपका फोकस थोड़ा हटता भी दिखा. कल आप 10 सेकेंड के बैरियर के बेहद करीब थे.  आप अपने फ़ाइनल रेस को कैसे याद करते हैं? 

गुरिंदरवीर सिंह: मैंने 100 मीटर की आख़िर में अपने चेस्ट पर जो लिखा था, मैं उसे हटाने लगा था. कल अगर यहां (रांची में) मॉन्डो ट्रैक होता और विंड स्पीड 1.8 मी./सेकेंड या 2.0 1.8 मी./सेकेंड होती और मैं इसी फ़ॉर्म में होता तो क्या पता कल ही 10 सेकेंड का बैरियर टूट जाता. 

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सवाल: एथलेटिक्स में एक कारनामा टोक्यो ओलिंपिक्स में नीरज चोपड़ा ने किया, क्या किसी भारतीय एथलीट को हम जल्दी ही 10 सेकेंड के अंदर भागता देख सकते हैं? 

 गुरिंदरवीर सिंह: बिल्कुल, हम सब उसी दिशा में तैयारी कर रहे हैं. भारत में सैंकड़ों टैलेंटेड एथलीट हैं. मैं सबसे टैलेंटेड नहीं हूं. मैं बहुत मेहनत भी करता हूं. लोग कहते हैं कि भारत में 100 मीटर का जीन्स नहीं है. मैं उसे ग़लत साबित करना चाहता हूं. आप आने वाले वक्त में देखेंगे कई भारतीय एथलीट 10 सेकेंड से कम वक्त में 100 मीटर भागते नज़र आयेंगे. 

सवाल: आपके कोच सरबजीत-हैप्पी से बात हो रही थी. वो कह रहे थे कि आप मेहनत तो बहुत करते हैं, मगर आपलोगों का संघर्ष भी बहुत बड़ा रहा है? 

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गुरिंदरवीर सिंह: देखिए, जहां मैं ट्रेनिंग करता हूं, वहां सही ट्रैक भी नहीं है. डाइट की दिक्कतें रहीं. स्पाइक्स खरीदना बेहद मुश्किल रहा. मेरे पिताजी और कोचों ने भी बहुत मेहनत की. एक बार हमें एक रेस के लिए हवाई जहाज़ से जाना ज़रूरी हो गया. हवाई जहाज़ से उतरे तो हमारे पास टैक्सी के पैसे नहीं थे- ना मेरे पास, ना सरबजीत सर के पास. ऐसे में हमने टैक्सी वाले को हमारे पास जो साबुन थे, उसे देकर स्टेडियम तक का सफ़र भी किया है. ये सब हम एथलीटों की दिनचर्या जैसी रही है. 

सवाल: आपके पिताजी वॉलीबॉल खेलते थे. आपको निजी स्पोर्ट में लाना चाहते थे. आप 100 मीटर में ही कैसे आये? * 

गुरिंदरवीर सिंह: (हंसते हुए बताते हैं) एक बार स्कूल के कोच श्रवण सिंह सर ने मुझे चक्कर लगाने को कहा. तो मैदान में मेरे पीछे कुत्ते भागने लगे. मैं बहुत तेज़ी से भागा. तो कोच ने कहा कि तुम स्प्रिंट में अच्छा भागोगे. चीन में एथलीट के टेस्ट और बायोमैकेनिक्स के लिए मशीन हैं. हमारे यहां कुत्ते ने ये काम कर दिया. 

सवाल: आपने सेमीफ़ाइनल में अनिमेष कुजूर का रिकॉर्ड तोड़ा जो 5 मिनट तक नेशनल रिकॉर्ड रहा. फिर आपने 10.09 सेकेंड का रिकॉर्ड बनाया. आप दोनों में कैसी राइवलरी है? 

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गुरिंदरवीर सिंह: हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं. ट्रैक के बाहर बहुत अच्छे दोस्त और ट्रैक पर एकदम दुश्मन. हमारी राइवलरी से हमारी रेस अच्छी होती है.

सवाल: आपको आपके पिता ने 2008ल बीजिंग ओलिंपिक्स में यूसेन बोल्ट का रेस दिखाया था. आपके रोल मॉडल कौन हैं?  

गुरिंदरवीर सिंह: मैं योहान ब्लेक का बड़ा फ़ैन हूं. यूसेन बोल्ट के वीडियो बहुत देखता हूं. जस्टिन गैटलिन की रेस भी देखता हूं. मेरे पास जब से कंप्यूटर आया है मैं सिर्फ़ एथलेटिक्स ही देखता रहता हूं. लेकिन मेरे रोल मॉडल मेरे पिताजी (कमलजीत सिंह) हैं. उन्होंने बहुत संघर्ष किया है. वो हर रोज़ नाइट शिफ्ट करने के बाद मुझे दूसरे शहर जालंधर एथलेटिक्स के लिए रोज़ छोड़ने आते थे. उन्होंने मेरे लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया.  

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सवाल: आपने 10.09 सेकेंड के नेशनल रिकॉर्ड का जश्न कैसे मनाया? 

गुरिंदरवीर सिंह: अभी तो बस केक ही काटा है. लेकिन मेरा मिशन पूरा नहीं हुआ है. अभी मुंबई जाऊंगा तो दोस्तों को ट्रीट दूंगा. लंबी विश लिस्ट है. लेकिन अपने खाने की विश लिस्ट एशियाड के बाद हू पूरी करूंगा. अभी बहुत कुछ करना बाक़ी है.  मैं रिलायंस फाउंडेशन में कोच जेम्स हिलर और अपने कोच सरबजीत सिंह हैप्पी सर के साथ ट्रेनिंग करता हूं मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है मेरे साथ कई सारे एथलीट अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

सवाल: क्या LA 2028 तक माना जा सकता है कि कोई भारतीय एथलीट सब-10 (यानी 10 सेकेंड) के अंदर 100 मीटर की रेस पूरी करेगा...किसी भारतीय के नाम के आगे 9 प्वाइंट समथिंग लिखा होगा? 

गुरिंदरवीर सिंह: दोखिए मैं करने से पहले कोई दावा नहीं करता कि मैं इतने या उतने में रेस भागूंगा. लेकिन कोई भारतीय एथलीट LA 2028 तक आपको सब-10 सेकेंड में 100मीटर की रेस भागता हुआ ज़रूर दिख सकता है. 

सवाल: NDTV से एक्सक्लूसिव बात करने का बेहद शुक्रिया गुरि. 
गुरिंदरवीर सिंह: थैंक यू पाजी.


 

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